राजनांदगांव , दिवाली पर्व में पटाखों से आगजनी की घटनाएं रोकने पटाखा व्यापारियों और लोगों को सावधानी बरतने एडवाइजरी जारी की गई है। विगत पांच सालों में पांच दिन के दिवाली पर्व के दौरान हर साल औसत 10 से ज्यादा आग लगने की घटना हुईं। वहीं केवल लक्ष्मी पूजन और गोवर्धन पूजा के दिन औसत हर साल 5 इस तरह पांच सालों में 25 से ज्यादा आगजनी की घटना हो चुकी है। इसमें किसी की जान तो नहीं गई, लेकिन गोदामों और दुकानों में सामान जल कर राख हो गया।
अग्निशमन सेवाएं एसडीआरएफ ने स्थायी और अस्थायी पटाखा दुकानों में आग से बचाव के लिए दिशा-निर्देश जारी किए है। जांच में अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन नहीं पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। जिला सेनानी एवं अग्निशमन अधिकारी ने बताया पटाखा दुकानें कपड़ा, बांस, रस्सी, टेंट से नहीं बनेंगी। टिन शेड की रहेगी। आमने-सामने नहीं रहेंगी।
3 मीटर का गैप रहेगा। तेल लैंप, गैस लैंप, खुले बिजली बल्ब नहीं जलेंगे। 50 मीटर में पटाखे नहीं जलेंगे। 6 किलोग्राम क्षमता का डीसीपी अग्निशामक यंत्र होना चाहिए। 500 लीटर क्षमता के पानी से भरे ड्रम रहेंगे। इधर निगम द्वारा म्यूनिसिपल स्कूल मैदान में पटाखा दुकान आवंटित करने 29 तक शुल्क जमा लेगा। उसी दिन लॉटरी से अस्थाई भूखंड का आवंटन किया जाएगा।
बीते 5 सालों में इन स्थानों पर लगी आग विगत वर्ष भाजपा कार्यालय के पीछे तेंदूपत्ते के गोदाम में आग लगी थी जबकि वहीं पास में बारदाने का गोदाम और आधा दर्जन आरा मिलें हैं। इससे पहले जमातपारा की राशन दुकान के वेंटिलेशन से जलता हुआ रॉकेट जाने से वहां आग लगी थी। इससे पहले सुंदरा के बांस टाल में भीषण आग लगी थी जो काफी मशक्कत के बाद बुझी। इसका कारण बांस खोखला होने से भीतर पानी नहीं पहुंचता और इसे बुझाने में समय लगता है।
