डोंगरगढ़ , नगर को स्वच्छ रखने के लिए संचालित मिशन क्लीन सिटी की व्यवस्था पर मणि कंचन केंद्र की बंद मशीनों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्र में कचरे का पृथक्करण तो किया जा रहा है, लेकिन प्लास्टिक निपटान की मशीनें वर्षों से बंद पड़ी हैं। ऐसे में प्लास्टिक कचरे के सुरक्षित निपटान को लेकर चिंता बढ़ गई है। वहीं, कर्मचारियों की तैनाती, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण में तालमेल की कमी और वसूली राशि में वृद्धि से भी असंतोष सामने आ रहा है।
मणि कंचन केंद्र में प्लास्टिक निपटान के लिए लगाई गई मशीनें लंबे समय से बंद हैं। मशीनों को चालू करने के लिए थ्री-फेज बिजली कनेक्शन और कचरा संग्रहण करने वाली महिलाओं को प्रशिक्षण देने की जरूरत थी, लेकिन ये कार्य अब तक पूरे नहीं हुए। इसके चलते ठोस प्लास्टिक कबाड़ में बेचे जाने और नरम प्लास्टिक जलाए जाने की स्थिति सामने आ रही है। मिशन क्लीन सिटी में कुल 81 कर्मचारियों की तैनाती बताई गई है। कर्मचारियों के अनुसार इनमें से 10 की ड्यूटी दूसरे क्षेत्रों में लगाए जाने से केंद्र में काम का दबाव बढ़ जाता है। स्वच्छता कमांडो के 20 कर्मचारियों में से 10 के मैदानी कार्य और 10 के वीआईपी सेवा में लगाए हैं।
वसूली 30 रुपए से बढ़ाकर 50 रुपए तक की गई थी क्लीन सिटी के तहत कचरा संग्रहण के लिए की जाने वाली वसूली राशि में वृद्धि को लेकर भी नाराजगी है। जानकारी के अनुसार पहले वसूली 30 रुपए से बढ़ाकर 50 रुपए की गई थी। बढ़ी हुई राशि को लेकर कुछ दुकानदारों और लोगों में असंतोष है। वसूली के दौरान कर्मचारियों और लोगों के बीच बहस होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। वसूली की दर और उसमें वृद्धि के नियमों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
कचरा संग्रहण में तालमेल की कमी से समस्या बढ़ी डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने वाली महिलाओं के अनुसार दुकानदारों के समय पर उपलब्ध नहीं होने या दुकानें बंद रहने से कई बार कचरा नहीं मिल पाता। इसके बाद कुछ दुकानदार कचरा निर्धारित स्थान पर देने के बजाय सड़कों और नालों के आसपास फेंक देते हैं। इससे शहर में प्लास्टिक कचरे के फैलने की समस्या बनी हुई है। कचरा खुले में पड़ा रहने से मवेशियों के उसे खाने का खतरा भी रहता है।
पालिका के क्लीन सिटी प्रभारी नितिन बख्शी ने बताया कि लोगों को सिंगल यूज प्लास्टिक और अन्य कचरा इधर-उधर नहीं फेंकने के लिए समय-समय पर जागरूक किया जाता है। कुछ लोग कचरा खुले में फेंक देते हैं। दुकानदारों से अपील की कि वे अपनी दुकानों के सामने छोटी डस्टबिन के बजाय बड़ी डस्टबिन रखें।
