राजनांदगांव : हास्य-व्यंग्य और पैरोडी गीतों के जरिए दिया नशामुक्ति का संदेश …
राजनांदगांव l शरद पूर्णिमा पर लायंस क्लब राजनांदगांव के द्वारा रंगारंग व साहित्यिक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, हास्य-व्यंग्य, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। देश-विदेश में अपनी काव्य प्रतिभा से पहचान बनाने वाले कवियों ने अपनी विविध विषयों पर आधारित रचनाओं से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। हास्य-व्यंग्य, पैरोडी गीतों, सामाजिक विसंगतियों, नशामुक्ति के संदेश तथा शरद पूर्णिमा की चांदनी और प्रकृति की सुंदरता पर आधारित काव्य प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राजगामी संपदा जिला अध्यक्ष पूर्णिमा साहू, समाजसेवी शारदा तिवारी थीं। इसके साथ ही डॉ. ओंकार लाल श्रीवास्तव, अमलेन्दु हाजरा, राकेश ठाकुर, पूर्व सैनिक राजेश शर्मा, डॉ. केके द्विवेदी, आनंद वर्गीज, जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष नारायण कन्नौज सहित अनेक अतिथियों की उपस्थिति रही। कवि सम्मेलन में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हास्य-व्यंग्य कवि पद्मलोचन शर्मा मुंहफट ने अपने चिरपरिचित अंदाज, तीखे व्यंग्य, रोचक हास्य और पैरोडी गीतों से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। उनकी प्रस्तुतियों में समसामयिक परिस्थितियों, सामाजिक विसंगतियों और आम जनजीवन से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिली। उनकी सहज, चुटीली और प्रभावशाली प्रस्तुति ने काव्य मंच पर विशेष रंग जमाया।
रिश्तों की महत्ता पर अपनी बात रखी: इस कवि सम्मेलन की विशेषता रही कि कवियों ने केवल मनोरंजन तक अपनी प्रस्तुतियों को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज को दिशा देने वाले महत्वपूर्ण विषयों को भी अपनी कविताओं में स्थान दिया। किसी कवि ने नशामुक्ति का संदेश देते हुए युवाओं और समाज को व्यसन से दूर रहने की प्रेरणा दी, तो किसी ने सामाजिक कुरीतियों पर अपनी बात रखी।
मानवीय मूल्यों, जनहित से जुड़े विषयों पर भी फोकस प्रख्यात कवि डॉ. शंकर मुनि राय गड़बड़ ने विशिष्ट काव्य शैली से श्रोताओं को प्रभावित किया। वहीं अनुराग सक्सेना ने अपनी रचनाओं से साहित्यिक संवेदनाओं और सामाजिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को अभिव्यक्त किया। कवि, व्याख्याता व राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक थंगेश्वर कुमार साहू मीत ने अपनी काव्य प्रस्तुतियों से सामाजिक जागरूकता, मानवीय मूल्यों और जनहित से जुड़े विषयों को स्वर दिया। कवयित्री सुषमा शुक्ला अंशुमन ने अपनी संवेदनशील रचनाओं से श्रोताओं को सराबोर किया।
