शिवनाथ नदी के बांकल तट से रेत उत्खनन को लेकर चल रहे विवाद में लीजधारक पर शिकंजा सक सकता है। चार विभागों की संयुक्त टीम द्वारा की गई जांच में लीज क्षेत्र की सीमा लांघकर रेत निकासी प्रमाणित हो गई है। ठेकेदार ने हां से 17500 क्यूबिक मीटर रेत अवैध रूप से निकाली है। हालांकि यह कितनी की होगी, इसकी गणना नहीं की जा सकी है, लेकिन इससे शासन को करोड़ों रुपये की राजस्व क्षति होने की आशंका जताई जा रही है। जांच प्रतिवेदन एसडीएम अरूण वर्मा ने कलेक्टर तारन प्रकाश सिन्हा को भेज दी है। शासन से मार्गदर्शन लेकर कार्रवाई तय करने की बात कही जा रही है।
ग्राम बाकल में खसरा नंबर 406 में 4.85 हेक्टेयर की लीज अर्चना दास के नाम परहै। इस क्षेत्र पर खनिज रनर मोल्डिंग सैंड का खनिज पट्टा 13 सितंबर 2004 से 12 सितंबर 2054 तक यानी 50 वर्षों की अवधि के लिए स्वीकृत है। लीज क्षेत्र की सीमा लांघने, पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर मशीनों का उपयोग करने व अन्य तरह की मनमानी की शिकायत के बाद प्रशासन ने तहसीलदार, खनिज अधिकारी, पर्यावरण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी समेत कुल चार विभागों की संयुक्त टीम बनाई थी। दो बार मौका मुआयना के बाद टीम ने पाया कि लीज सीमा से अलग क्षेत्र में भी रेत का उत्खनन किया गया है। वहां से कुल 17500 क्यूबिक मीटर रेत अवैध रूप से निकाल ली गई। इसे खनिज अधिनियम के विपरित भी माना गया है।
ठेकेदार ने भी रखा अपना पक्ष एसडीएम वर्मा ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रतिवेदन तैयार करने से पहले लीजधारक का भी पक्ष लिया गया। उन्होंने बताया कि लीज सीमा से ही रेत निकासी की गई है। इसके पहले उन्होंने लीज क्षेत्र का सीमांकन कराने की भी बात रखी। बताया गया कि प्रतिवेदन में लीजधारक के पक्ष को भी शामिल किया गया है।
शासन से लिया जाएगा मार्गदर्शन नदी से अवैध उत्खनन की शिकायत सही पाए जाने के बाद लीजधारक के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है। चुंकि रेत घाट का पट्टा शासन स्तर पर जारी हुआ है। इस कारण मार्गरदर्शन के बाद ही कार्रवाई तय की जा सकेगी। इसके पहले नदी से अवैध रूप से निकाली गई रेत की लागत की गणना की जाएगी। इसके लिए खनिज विभाग चाहे तो मौके का परीक्षण भी कर सकता है।
जांच में यह गड़बड़ी पाई
-लीज सीमा के बाहर से रेत उत्खनन
-नदी के बीच नियम विरूद्ध रेंप
-धार बाधित कर नदी की दिशा बदली
-रेत निकासी के लिए मशीनों का उपयोग
