रायपुर. प्रदेश में गर्मी का पारा जैसे-जैसे बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे बिजली की खपत भी बढ़ती जा रही है. सूबे में नौतपा के बीच पिछले 3 से 4 दिनों में बिजली की खपत 3500 मेगावाट से ऊपर पहुंच गई है. मालूम हो कि कोरोना की वजह से अभी भी उद्योग पूरी क्षमता के साथ नहीं चल रहे हैं और सरकारी कार्यालयों में भी कम स्टाफ होने के कारण फिलहाल बिजली की खपत काफी कम है. ऐसा नहीं हुआ होता तो डिमांड 4000 मेगावाट से अधिक हो जाती. वहीं रायपुर दुर्ग समेत कुछ शहरों में तापमान 45 डिग्री से अधिक है. तपती गर्मी में अब लोग एसी और कूलर का ही सहारा ले रहे हैं.
हालत ऐसी हो गई है कि तेज गर्मी की वजह से हर घर में एयर कंडीशनर, कूलर और पंखे पूरी क्षमता के साथ करीब 13 से 15 घंटे तक चल रहे हैं. इन दिनों प्रदेश में बिजली की खपत करीब 3509 मेगावाट है. वहीं बिजली की उपलब्धता 3568 मेगावाट है. पावर कंपनी को सेंट्रल सेक्टर से 1428 मेगावाट बिजली मिलती है. मडवा प्लांट के 500-500 मेगावाट की दो यूनिट थी जिसमें से एक यूनिट के बंद होने के बाद भी प्रदेश में बिजली की पर्याप्त उपलब्धता है. कोरबा स्थित DSPM की दोनों यूनिट से करीब 200-200 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है. लॉकडाउन की वजह से अभी उद्योगों में बिजली की खपत कम है. पिछले साल इस समय बिजली की खपत 4000 से 4200 मेगावा तक थी. अभी भीषण गर्मी के साथ ही साथ बिजली का खपत बढ़ी है. अभी जैसे नौतपा चल रहा है, तो आने वाले समय में भी बिजली की खपत में किसी प्रकार की कमी आने की कोई संभावना दिख नहीं रही है. पावर जनरेशन कंपनी के एमडी एनके बिजौरा का कहना है कि यह सही है कि इस समय प्रदेश में गर्मी के साथ बिजली की खपत बढ़ी है, लेकिन संकट जैसी स्थिति नहीं है. मांग के अनुसार बिजली की पर्याप्त उपलब्धता है. तो वहीं गर्मी के सितम के बीच कोरोना भी अपने पैर पसार रहा है. प्रदेश में कोरोना के पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ रही है.
