राजनांदगांव | भीषण गर्मी के बीच मानवता और सेवा का संदेश देते हुए गुरुद्वारा बंदी छोड़ पातशाही 6 तुमड़ीबोड़ के प्रबंधक सेवादारों व संगत ने राहगीरों को मीठा जल वितरित कर छबील सेवा का आयोजन किया। यह सेवा सिखों के पांचवें गुरु, गुरु अर्जुन देव की शहादत की स्मृति में की गई, जिन्होंने सत्य, धैर्य और मानव कल्याण के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी व मुख्य ग्रंथी ज्ञानी नरिंदर सिंह ने बताया कि गुरु अर्जुन देव का जीवन साहस, समर्पण और अटूट आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अत्यंत कठिन यातनाएं सहने के बावजूद गुरुजी का मन अकाल पुरख से जुड़ा रहा और वे अपने सिद्धांतों से कभी विचलित नहीं हुए। उनकी शहादत को सिख इतिहास में लासानी शहादत के रूप में याद किया जाता है।
कहा कि गुरु अर्जुन देव का इतिहास हमें हर परिस्थिति में धैर्य, संयम और सत्य के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। छबील सेवा केवल शीतल जल पिलाने का कार्य नहीं, बल्कि मानवता, परोपकार और सेवा भाव को समाज तक पहुंचाने का माध्यम है। इस अवसर पर संगत ने लोगों को गुरु साहिब के आदर्शों पर चलने का संदेश भी दिया।
