CG : राज्योत्सव के बीच पटवारियों का आंदोलन तेज, तूता से हटाया तो मंदिर को बनाया ठिकाना …
रायपुर : छत्तीसगढ़ में 13 अक्टूबर से जारी पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच रायपुर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अभनपुर तहसील प्रशासन की ओर से 28 हड़ताली पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में शासकीय कार्य प्रभावित होने और आम नागरिकों को परेशानी का सामना करने का उल्लेख करते हुए दो दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है। दूसरी ओर, राज्योत्सव की तैयारियों के कारण तूता धरना स्थल से हटाए जाने के बाद भी पटवारियों का आंदोलन जारी है। राज्योत्सव स्थल तूता के सामने धरना दे रहे पटवारियों को आयोजन की तैयारियों के मद्देनजर वहां से हटाया गया था। इसके बाद आंदोलनकारियों ने भाठागांव क्षेत्र में हनुमान मंदिर के पास अपना धरना जारी रखा। धरना स्थल बदलने के बावजूद पटवारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
2 नवंबर को जारी हुआ कारण बताओ नोटिस जानकारी के अनुसार, कार्यालय तहसीलदार अभनपुर से 2 नवंबर 2026 को जारी नोटिस में हड़ताल के कारण पटवारियों की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि कर्मचारियों के लगातार कार्य से अनुपस्थित रहने के कारण सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से राजस्व विभाग से जुड़े काम समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। नोटिस में संबंधित पटवारियों को दो दिनों के भीतर स्वयं उपस्थित होकर लिखित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हड़ताल से उत्पन्न परिस्थितियों के संबंध में कर्मचारियों का स्पष्टीकरण जरूरी है। हालांकि, कारण बताओ नोटिस जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी 28 पटवारियों पर अंतिम अनुशासनात्मक कार्रवाई हो चुकी है। उनके जवाब मिलने और उसकी समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई का निर्णय लिया जा सकता है।
13 अक्टूबर से जारी है पटवारियों का आंदोलन छत्तीसगढ़ में राजस्व पटवारी संघ ने 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की थी। पटवारी संघ की प्रमुख मांगों में पीवी ऐप से जुड़ी तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं का समाधान, कर्मचारियों के खिलाफ की गई प्रशासनिक कार्रवाइयों पर पुनर्विचार तथा लंबित मांगों का निराकरण शामिल है। हड़ताल की शुरुआत और इन मुद्दों की पुष्टि पूर्व प्रकाशित रिपोर्टों से भी होती है। पटवारियों का कहना है कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस पहल की जानी चाहिए। वहीं प्रशासन का जोर राजस्व सेवाओं को सामान्य बनाए रखने पर है। दोनों पक्षों के बीच जारी गतिरोध के कारण आंदोलन लंबा खिंचता दिखाई दे रहा है।
राजस्व कामकाज पर पड़ रहा असर पटवारियों की हड़ताल से जमीन संबंधी विभिन्न सरकारी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पटवारी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भूमि रिकॉर्ड, फसल सत्यापन, राजस्व अभिलेखों और अन्य प्रशासनिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पटवारियों की अनुपस्थिति से जमीन के दस्तावेजों से जुड़े काम, राजस्व रिकॉर्ड के सत्यापन और किसानों से संबंधित प्रक्रियाओं में देरी होने की आशंका बनी हुई है। राज्य में धान खरीदी की तैयारियों के बीच पटवारियों की हड़ताल से किसान पंजीयन और फसल संबंधी कार्य प्रभावित होने की खबरें भी सामने आई हैं।
प्रदेश के अन्य जिलों में भी प्रशासन सख्त पटवारियों के आंदोलन को लेकर प्रशासनिक सख्ती केवल रायपुर तक सीमित नहीं है। प्रदेश के अन्य जिलों में भी हड़ताली पटवारियों को ड्यूटी पर लौटने और अनुपस्थिति के संबंध में स्पष्टीकरण देने के निर्देश जारी किए गए हैं। कुछ जिलों से निलंबन की कार्रवाई की खबरें भी सामने आई हैं। रायपुर में जारी 28 कारण बताओ नोटिस के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित पटवारी क्या जवाब देते हैं। साथ ही, प्रशासन और पटवारी संघ के बीच बातचीत से हड़ताल समाप्त करने का कोई रास्ता निकलता है या नहीं। फिलहाल राज्योत्सव के कारण धरना स्थल बदलने के बाद भी आंदोलन जारी है। एक ओर पटवारी अपनी मांगों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन राजस्व सेवाओं को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए कदम उठा रहा है।
