राजनांदगांव : फर्जी सूखत : 1696 क्विंटल धान की अफरा-तफरी 52.57 लाख रुपए का धान गबन, FIR की तैयारी…
राजनांदगांव , जिले के बागरेकसा केंद्र में 52.57 लाख रुपए के धान का फर्जी सूखत सामने आया है। वजन में फर्जीवाड़ा कर हर गाड़ी से 2-2 किलो धान गायब किए गए। औचक निरीक्षण में शुक्रवार को इसकी पोल खुल गई। समिति प्रबंधक, ऑपरेटर सहित संलिप्त कर्मचारियों पर एफआईआर की तैयारी की जा रही है।
प्रशासनिक अधिकारियों के संयुक्त दल ने धान खरीदी में चल रहे एक बड़े और सुनियोजित डिजिटल घोटाले का भंडाफोड़ किया है। डोंगरगढ़ के आदिम जाति सेवा सहकारी समिति बागरेकसा में औचक निरीक्षण के दौरान 52.57 लाख मूल्य के कुल 1,696.06 क्विंटल धान का गबन उजागर हुआ है। समिति के कर्मचारियों ने रिकॉर्ड में हेराफेरी कर घोटाले को अंजाम दिया।
मौके पर मौजूद केंद्र प्रभारी नीलकंठ साहू और डाटा एंट्री ऑपरेटर ओम कुमार यादव ने गायब धान को सूखत (वजन में प्राकृतिक कमी) बताकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की, लेकिन जांच दल की कड़ाई के आगे यह फर्जीवाड़ा टिक नहीं सका। इस गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी और शासकीय संपत्ति के गबन के मामले को प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। दोषी समिति प्रबंधक नीलकंठ साहू, ऑपरेटर ओम कुमार यादव सहित अन्य संलिप्त कर्मचारियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जांच दल ने जब ऑनलाइन रिपोर्ट और वास्तविक रिकॉर्ड का मिलान किया, तो गड़बड़ी सामने आ गई। सीजन में केंद्र ने कुल 1,64,169 बोरियों में 65,627.60 क्विंटल धान खरीदा था। इसमें से 29,501.46 क्विंटल धान राइस मिलर्स को और 34,430.08 क्विंटल संग्रहण केंद्रों को भेजा गया। इस तरह कुल 63,931.54 क्विंटल धान का उठाव हुआ। कम्प्यूटर रिकॉर्ड के मुताबिक केंद्र में 1,696.06 क्विंटल धान शेष होना अनिवार्य था, लेकिन भौतिक सत्यापन में उपार्जन केंद्र परिसर के भीतर न तो बोरियों में और न ही खुले में एक किलोग्राम धान भी नहीं मिला।
इस फर्जीवाड़े के तहत 875 बोरियों वाले वाहनों में वास्तविक वजन को छुपाकर काल्पनिक रूप से 17.50 क्विंटल धान की कमी दर्ज की गई। इसी तरह, 800 बोरियों वाले वाहनों में सीधे 16.00 क्विंटल धान की फर्जी कमी दिखाई गई। घोटाला यहीं नहीं रुका, 700 बोरियों वाले वाहनों में 14.00 क्विंटल, 600 बोरियों वाले वाहनों में 12.00 क्विंटल तथा 500 बोरियों वाले वाहनों में भी 10.00 क्विंटल धान की मनगढ़ंत कमी कम्प्यूटर मॉड्यूल में दर्ज की गई। अब धीरे-धीरे परतें खुलने लगी है।
